सत्य घटना पे आधारित डरावनी भूतों की कहनियाँ | Real Horror Stories In Hindi

भारतीय जनजीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भूत-प्रेत की कहानियाँ जो की रहस्यमय, डरावनी और रोमांच से भरी होती है। जिस समय रात के अंधेरे में चुपके से दूरदर्शी के समान बैठकर, अजीब और भयानक Bhoot ki kahaniyan सुनाई जाती हैं, तो दिल धड़क उठता है और रूह कांप जाती है। यही वो अनूठी ताक़त हैं, जो भूतों की कहानियों को हर समय चर्चा का विषय बनाती है।

real-bhoot-ki-kahaniyan
Today Bhoot ki kahani

बचपन में हम सब अपने बड़ो से कहानियां सुनते हैं , जिनमे से कुछ कहानी Real Bhoot Ki kahaniya होती है। कईबार तो ऐसा होता है बचपन में जब हम ऐसी डरावनी कहानियाँ सुन लेते हैं तो डर के मारे अकेले बहार नहीं जा पाते हैं।

आज हम आपके लिए वैसी ही कुछ सच्ची और दिल दहला देने वाली रहस्यमयी, डरावनी, Real Bhoot Ki kahani लेके आएं हैं। इन डरावनी और रहस्यपूर्ण ग़तियों में दिखते हैं जिंदगी और मौत के बीच के अनजान सफर, जो हमारे आसपास के जगत में छिपे रहते हैं।

चलिए शुरू करते हैं हम अपने आर्टिक्ल Real Bhoot ki kahaniya को और आप अंत तक हमसे जुड़े रहे।

रात की सवारी: Real Bhoot Ki kahani

रात के 2:00 बज रहे थे, दोनों की बारिश हो रही थी। घना अंधेरा था, बादल रह-रहकर गरज रहे थे। थोड़ी थोड़ी देर पर बिजली चमकती तो आसपास की चीजें दिखाई पड़ती थी नहीं तो हाथ को हाथ दिखना भी मुश्किल लग रहा था। झारखंड के घाटशिला स्टेशन के बाहर रामदेव अपना ऑटो लगाए सवारी का इंतजार कर रहा था।

real bhoot ki kahani
सच्ची भूतिया घटना 

इस मौसम में सवारी मिलने की उम्मीद कम थी फिर भी हो सकता था कुछ देर बाद आने वाली ट्रेन से कोई सवारी आ जाए। करीब 1 घंटे बाद ट्रेन आई। थोड़ी देर बाद बिजली चमकने पर 18-20 वर्ष की मॉडर्न सी लड़की कंधे पर एक बैग लटकाए बाहर निकलती दिखी। सीधे उसके औरतों के पास पहुंची और मुसाबनी चलने को कहा।

रामदेव ने कहा कि रात का वक्त है इसलिए वहां चलने पर ₹500 लूंगा, नहीं तो 2- 4 घंटे इंतजार कर लीजिए सुबह ₹100 में ले चलूंगा। लड़की बोली “ अभी ₹200 रखो बाकी वहां पहुंच कर दूंगी”, और इतना बोलकर ऑटो में बैठ गई।

रामदेव ने ऑटो बढ़ा दिया। करीब आधा घंटे बाद वह पते पर पहुंचा। एक मकान के बाहर लड़की ने ऑटो रुकवाई और घर से पैसे लेने की बात कहकर अंदर चली गई।

काफी देर तक वह नहीं लौटी तो रामदेव अकेले बैठे-बैठे परेशान हो गया। उसने घर का दरवाजा खटखटाया पर काफी देर के बाद एक बूढ़े ने आंखें मलते हुए दरवाजा खोला। उसने पूछा “ कौन हो तुम और इतनी रात को किस लिए आए हो?”

रामदेव बोला “ साहब मैं ऑटो वाला हूं थोड़ी देर पहले एक लड़की मेरे ऑटो से इस घर में पैसे लेने के लिए गई थी, वह अभी तक मेरे पैसे लेकर नहीं आई”।

बूढ़े ने आश्चर्य से उसकी ओर देखा और बोला “ यहां तो कोई भी लड़की नहीं रहती, मैं अकेला यहां रहता हूं।”

रामदेव की नजर घर में रखे एक फोटो पर पड़ी, और वह उस फोटो को देखकर बोला यही तो मैडम आई थी जिन्हें मैं स्टेशन से लेकर आया हूं।

बूढ़े ने उसे आश्चर्य से देखा और फिर बोला “ इस लड़की को मरे 8 साल हो गए हैं, यह मेरी पोती है,” इतना सुनकर ऑटो वाला डर के मारे कांपने लगा।

रामदेव के होश उड़ गए और चुपचाप अपने ऑटो के पास पहुंचा। उसने देखा कि सीट पर सौ सौ के 3 नोट रखे थे। उसने नोटों को जेब में रखा और वहां से बेतहाशा भागा। उस दिन से उसने रात को ऑटो चलाना बंद कर दिया।

पुराना कब्रिस्तान: एक भूतिया पिकनिक कहानी

यह कोई काल्पनिक कहानी या फिल्म की कहानी नहीं है बल्कि आंखों देखा सच है! मैं कंपनी की ओर से पिकनिक पर गया हुआ था। पिकनिक शहर के बाहर एक रिसॉर्ट में थी। पहले कंपनी के लोगों ने क्रिकेट और अन्य खेल खेले, उसके बाद रिसोर्ट में ही बने वाटर पार्क में चले गए थे। वहां केवल कुछ लोगों को ही तैरना आता था।

हम दोस्तों में एक शर्त लगी, पानी में एक सिक्का फेंका जाएगा और जो सबसे कम समय में सिक्का ढूंढ कर लाएगा वह जीत जाएगा। सब ने बारी-बारी से गोता लगाया पर किसी को सिक्का मिला तक नहीं उसका अगली बारी मेरी थी, मैं भी कूद गया, लेकिन पानी में जाते ही दृश्य बदल गया।

मैंने पाया कि जमीन 20 या 25 फीट दूर थी, नीचे एक कब्रिस्तान दिखाई दे रहा था। वहां एक औरत खड़ी थी जो चेहरे और पोशाक से भारतीय नहीं लग रही थी। उसके हाथ में वही सिक्का था, वह अपना हाथ ऊपर की ओर करके खड़ी थी। मैं जैसे उसके सम्मोहन में आगे बढ़ता चला जा रहा था। कुछ क्षणों में मैं उसके करीब था और मैंने उसके हाथ से सिक्का ले लिया। जैसे ही मैं वापस आने लगा, उसने मेरा हाथ पकड़ कर खींच लिया।

💡 Also Read This 💡

अब उसका और मेरा चेहरा आमने-सामने था, एक ही पल में उसका चेहरा एक भयानक रूप में बदल गया था। उसकी आंखों से खून निकल रहा था और उसके चेहरे पर एक भयानक सी मुस्कान थी।

मेरे डर की कोई सीमा नहीं थी, मैं डर के मारे कांप रहा था। मैंने झटके से अपना हाथ छुड़ाया, हाथ छोड़ आते ही कब्रिस्तान और महिला दोनों गायब हो गए और मैंने अपने आप को पुल मैं पाया मुझे लगा जैसे कि मैं किसी सपने से जागा हूं। मैं जल्दी से पानी से बाहर आ गया और दूर जाकर बैठ गया मेरी सांस फूल रही थी और मैं खास रहा था, मेरे दोस्त मेरी मदद करने लग गए। थोड़ी देर बाद मैं अच्छा महसूस कर रहा था।

हर कोई पूछ रहा था कि क्या हुआ? मैंने बस सर हिलाते हुए “कुछ नहीं” मैं जवाब दिया। मैंने मुट्ठी खोलकर देखी तो सिक्का मेरे हाथ में था, यह देख मेरे दोस्त खुशी से उछल में लगे और मुझे बधाई देने लगे। दोस्तों ने फिर से शर्त लगाई मगर मैं फिर से पानी में नहीं गया।

शाम हो गई थी, हमारी बस जाने वाली थी, हम कुछ लोग सिगरेट पीने बाहर चले गए थे। जब मैंने उस घटना के बारे में अपने दोस्तों को बताया तो मेरे दोस्त मजाक कर रहे थे और जोर जोर से हंस रहे थे। सामने खड़े एक अंकल हमारी बातें गौर से सुन रहे थे और बीच-बीच में अपने तीखे नजरों से हमें देख रहे थे।

मैं चुपचाप खड़ा था तो मेरे दोस्तों ने मुझे बोला कि “अरे यार! यह भूत भूत कुछ नहीं होता तुझे वहम हुआ होगा।”

हमारी बातें सुनकर वहां खड़े अंकल ने हमें बताया कि अंग्रेजों के जमाने में यहां कब्रिस्तान हुआ करता था, जरूर किसी अंग्रेज कब भूत देख लिया होगा क्योंकि यहां अक्सर लोगों को कुछ अंग्रेज लोगों की आत्माएं दिखती हैं। यह सुनकर मेरे दोस्त मुझ पर यकीन करने लगे और हम जल्दी वहां से अपने घर की ओर निकल गए।

डरावने फ्लैट का भूतिया सच: Horror story in Hindi

बात 15 सोलह साल पहले की है। मैं जिस जगह पर काम करता था वहीं पास में एक फ्लैट किराए पर लिया था। इस फ्लैट में मैं अकेले रहता था, पर कभी-कभी कोई मित्र संबंधी आदि भी आते रहते थे। इस फ्लैट में एक बड़ा सा हॉल था और इसी हॉल से अटैच एक बाथरूम और रसोईघर था।

today bhoot ki kahani
Bhootiya ghar

छोटे से परिवार के लिए यह फ्लैट बहुत ही अच्छा था और सबसे खास बात इस फ्लैट की यह थी कि यह पूरी तरह से खुला खुला था। मैं आपको बता दूं कि इस फ्लैट का होल बहुत बड़ा था और इसके पिछले छोर पर शीशे जड़ित दरवाजे लगे थे जिसे आप आसानी से खोल सकते थे। पर मैं इस हॉल के पिछले भाग को बहुत कम ही खुलता था क्योंकि कभी-कभी भूल बस अगर यह खुला रह गया तो बंदर आदि आसानी से घर में आ जाते थे और बहुत सारा सामान इधर-उधर कर देते थे।

आप सोच रहे होंगे कि बंदर आदि कहां से आते होंगे तो मैं आप लोगों को बताना भूल गया कि यह हमारी बिल्डिंग एकदम से एक सुनसान किनारे पर थी और इसके अगल-बगल में बहुत सारे पेड़ पौधे, जंगली झाड़ियां आदि थी। अपने फ्लैट में से नीचे झांकने पर सांप आदि जानवरों के दर्शन आम बात थी।

एक दिन शाम के समय मेरे गांव का ही एक लड़का जो उसी शहर में किसी दूसरी कंपनी में काम करता था, मुझसे मिलने आया। मैंने उससे कहा कि आज तुम यही रुक जाओ और सुबह यही से ड्यूटी चले जाना। पर वह बोला कि मेरी ड्यूटी सुबह 7:00 बजे से होती है इसलिए मुझे 5:00 बजे जगना पड़ेगा और आप तो 7-8 बजे तक सोए रहते हैं तो कहीं मैं नहीं सोया रह गया तो मेरी ड्यूटी नहीं हो पाएगी। 

इस पर मैंने कहा कि कोई बात नहीं एक काम करते हैं, 4:00 बजे सुबह का अलार्म लगा देते हैं और तू जल्दी से जमकर अपने लिए टिफिन भी बना लेना पर हां एक काम करना मुझे मत जगाना। इसके बाद रहने को तैयार हो गया। रात को खा पीकर लगभग 11:30 तक हम लोग सो गए। हम दोनों हॉल में ही सोए थे। मैं खाट पर सोया था और वह लड़का लगभग मेरे से 2 मीटर की दूरी पर चटाई बिछाकर नीचे ही सोया था। रात को सोते समय मैं हॉल में जीरो वाट का बल्ब जलाकर रखता था।

अचानक लगभग रात के 2:00 बजे मेरी नींद खुली, लेटे-लेटे ही मेरी नजर किचन के दरवाजे की ओर चली गई। मैं देखता हूं कि एक व्यक्ति किचन का दरवाजा खोलकर अंदर गया और फिर से किचन का दरवाजा धीरे-धीरे बंद हो गया। मुझे इसमें कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि मुझे पता था कि गांव वाला लड़का ड्यूटी के लिए लेट ना हो इस चक्कर में जल्दी जग गया होगा।

बिना गांव वाले बच्चे की और देखे ही यह सब बातें मेरे दिमाग में उठ रही थी- पर अरे! यह क्या फिर से अचानक किचन का दरवाजा खुला और उसमें से एक आदमी निकलकर बाथरूम में घुसा और फिर से बाथरूम का दरवाजा अपने आप बंद हो गया। अब तो मुझे थोड़ा गुस्सा भी आया और जो कि वह गांव का लड़का रिश्ते में मेरा भाई लगता था इसलिए मैंने घड़ी देखी और उसके बिस्तर की ओर देखकर गाली देते हुए बोला कि बेटे अभी तो 3:00 भी नहीं बजा है और तू जागकर खतर पटर शुरू कर दिया।

उसके बिस्तर की ओर देखते ही मैंने देखा कि गांव वाला लड़का अपनी जगह पर आराम से सो रहा था। तो वह बाथरूम में जाने वाला आदमी कौन था?

अब तो मैं फटाक से खाट से उठा और दौड़ कर उस गांव वाले बच्चे को जगाया, वह आंखें मलते हुए उठा पर मैं उसको कुछ बताए बिना सिर्फ इतना ही पूछा कि क्या तू तो 3 मिनट पहले जगा था तो वह बोला नहीं तो और इतना बोल कर वह फिर से सो गया।

अब मेरे समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था, मैंने हॉल में लगे ट्यूबलाइट को भी जला दिया था। अब पूरे हॉल में पूरा प्रकाश था और मेरी नजरें अब कभी बाथरूम के दरवाजे पर तो कभी किचन के दरवाजे पर थी। किचन और बाथरूम के दरवाजे अब पूरी तरह से बंद थे, मैं हिम्मत करके उठा और धीरे से जाकर बाथरूम का दरवाजा खोला। 

बाथरूम में मुझे कोई नहीं दिखा इसके बाद मैंने किचन का दरवाजा खोला और उसमें भी लगे बल्ब को जला दिया पर वहां भी कोई नहीं था। यह सब देखकर मेरी नींद बिल्कुल उड़ चुकी थी। इस घटना का जिक्र मैंने किसी से नहीं किया। मुझे लगा यह मेरा वहम था और अगर किसी को बताऊंगा तो कोई भी मेरे रूम में आने से डरेंगे।

इस घटना को बीते लगभग 1 महीने हो गए थे और रात को फिर कभी मुझे ऐसा अनुभव नहीं हुआ। एक दिन मेरे गांव के 2 लोग हमारे पास आए। उनमें से एक को विदेश जाना था और दूसरा उनको छोड़ने आया था, वह लोग रात को मेरे यहां ही रुके थे और उस रात में अपने एक रिश्तेदार से मिलने चला गया था और रात को वापस नहीं आया।

सुबह सुबह जब मैं अपने रूम पर पहुंचा तो वह दोनों लोग तैयार होकर बैठे थे, और मेरा ही इंतजार कर रहे थे। ऐसा लग रहा था कि वह बहुत ही डरे हुए और उदास थे। मेरे आते ही वह लोग बोल पड़े कि अब हम लोग जा रहे हैं। मैंने उन लोगों से पूछा की फ्लाइट तो कल है आज की रात आप लोग कहां ठहरेगे।

उनमें से एक ने बोला हम रोड पर सो लेंगे पर इस कमरे में नहीं। इतना सुनते ही मुझे 1 महीने पहले की घटना याद आने लगी। मैंने सोचा तो क्या इन लोगों ने भी इस फ्लैट में किसी अजनबी को देखा?

मैंने उन लोगों से पूछा कि आखिर बात क्या हुई तो उनमें से एक ने कहा कि रात को कोई व्यक्ति आकर मुझे जगाया और बोला कि कंपनी में चलते हैं, मेरा पर्स वही छूट गया है। फिर मैं थोड़ा डर गया और इसको भी जगा दिया। इसने भी उस व्यक्ति को देखा वह देखने में एकदम सीधा साधा लग रहा था और शालीन भी।

हम लोग एकदम डर गए थे क्योंकि हमें वह व्यक्ति इसके बाद किचन में जाता हुआ दिखाई दिया था और उसके बाद फिर कभी किचन से बाहर नहीं निकला और हम लोगों का डर के मारे बुरा हाल था। हम लोग रात भर बैठ कर हनुमान का नाम जपते रहें और उस किचन के दरवाजे की ओर टकटकी लगाकर देखते रहे पर सुबह हो गई और वह आदमी अभी तक किचन से बाहर नहीं निकला है।

अब तो मैं भी थोड़ा डर गया और उन दोनों को साथ लेकर तेजी से किचन का दरवाजा खोला पर किचन में तो कोई नहीं था। हां पर किचन में गौर से छानबीन करने के बाद हमने पाया कि कुछ तो गड़बड़ है। किचन के कुछ सामान इधर-उधर फैले थे और एक अजीब सी दुर्गंध फैली हुई थी। 

खैर, यह एक रहस्य ही रह गया कि आखिर वह कौन था? हम लोगों को लगा कि वह वहम था यह वास्तव में कोई आत्मा हमारे रूम में आई थी। मैंने इससे छुटकारा पाने के लिए उस फ्लैट को ही चेंज कर दिया और दूसरे बिल्डिंग में आकर शांतिपूर्वक रहने लग गया। वह आज याद तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं क्योंकि मुझे अब तक समझ नहीं आया कि वह व्यक्ति या यूं कहें आत्मा कौन थी?

निष्कर्ष 

इन Bhoot ki kahaniyan का रहस्यमयी सफर यहीं समाप्त होता है। उम्मीद है आपको हमारा ये कहानी बहुत अच्छा लगा होगा। आप अपने विचार कमेंट कर के अवश्य बतायेँ। इन Real Bhoot Ki kahani ने रहस्यमय शक्तियों को हमारे सामने लाया है। इन सच्ची कहानियों के माध्यम से हमने भूत- प्रेत जगह के कुछ अनसुलझे रहस्य से रूबरू हुए हैं । अब हमलोग Horror story in hindi के अगले लेख में मिलेंगे।

एक टिप्पणी भेजें (0)
और नया पुराने